मस्जिद या मंदिर फैसला आज? देखे पूरी रिपोर्ट

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Gyanvapi Masjid

ज्ञानवापी को लेकर यूपी में अलर्ट, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

मस्जिद या मंदिर (Masjid vs temple) सर्वे रिपोर्ट पर इस समय पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। मामले के राजनीतिकरण होने के बाद से घटना दुर्घटना की आशंकाएं काफी बढ़ गई हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश को अर्लट कर दिया गया है। गुरुवार को एडवोकेट कमिश्नर विशाल सिंह ने वाराणसी कोर्ट को ज्ञानवापी मस्जिद से संबंधित अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। जानकारी के मुताबिक पूर्व एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्रा और विशाल प्रताप सिंह के सर्वे की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मस्जिद (Masjid) के अंदर मंदिर (Gyanvapi Masjid vs temple) की निशानी पाई गई है और वहां शिवलिंगनुमा चीज भी मिली है। वहीं सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने ज्ञानवापी मामले में निचली अदालत से आगे की सुनवाई करने से अभी रोक दिया है। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय आज यानी शुक्रवार को करेगा।

बता दें कि एडवोकेट कमिश्नर विशाल सिंह ने कोर्ट में जो रिपोर्ट दी है, उसके सातवें पन्ने के पहले पैराग्राफ में साफ साफ लिखा है कि वादीगण के अधिवक्ता की तरफ से कमीशन की कार्यवाही के दौरान कोर्ट कमिश्नर का ध्यान आकृष्ट कराया गया कि इस कुंड के बीचों-बीच भगवान शिव का शिवलिंग है। करीब 8 बजकर 40 मिनट पर कुशल ड्राफ्टमैन बीडीए की ओर से नन्दी से कुंड तक नाप की गयी जिसकी दूरी 83 फीट 3 इंच पाई गई। उस वक्त वादी के अधिवक्ता की तरफ बताया गया कि पानी के कुंड के बीचों-बीच में गोलाकार कुएं की जगत जैसे जगह के बीच में पत्थर कायम है और उनके द्वारा कमिशन कार्यवाही के लिए ध्यान आकृष्ट कराया गया कि इसके बीचों-बीच भगवान शिव का शिवलिंग है।

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सर्वे टीम ने वाराणसी कोर्ट में प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट के दूसरे पैरा में लिखा है कि कैसे मछली पालन अधिकारी की सलाह पर पानी को दो फीट नीचे तक कम किया गया, ताकि तालाब की मछलियां जिंदा रह सकें। रिपोर्ट में बताया गया है कि पानी कम करने पर काली गोलाकार पत्थरनुमा आकृति जिसकी ऊंचाई करीब 2.5 फीट रही होगी दिखाई पड़ी। वहीं इसके टॉप पर कटा हुआ गोलाकार डिजाइन का अलग सफेद पत्थर दिखाई दिया, जिसके बीचो-बीच आधी इंच से थोड़ा कम गोल छेद था, जिसमें सीक डालने पर 63 सेमी. गहरा पाया गया। इसकी गोलाकार आकृति की नापी कराई गई तो बेस का व्यास लगभग 4 फुट पाया गया। इस दौरान कमीशन कार्यवाही वादी पक्ष के अधिवक्तागण इस गोलाकार काले पत्थर को शिवजी का शिवलिंग मानने लगे, इस पर प्रतिवादी संख्या 4 के अधिवक्ता की तरफ से कहा गया कि यह फव्वारा है।

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