छुट्टा पशु बने मुसीबत, हवा-हवाई हैं सरकारी दावे

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प्रकाश सिंह

गोंडा: छुट्टा पशुओं को संरक्षित करने के लिए सरकार ने गौशालाओं का निर्माण करा, इसके लिए अच्छा खासा धन भी आवंटित हो रहा है। सरकारी आंकड़ों में गौशालाओं में गोवंश भी हैं। लेकिन यह सब हकीकत से ठीक उलट है। गोवंश गौशाला की जगह सड़क या किसानों के खेतों में नजर आ रहे हैं। सड़कों पर छुट्टा जानवरों के चलते जहां आए दिन लोग दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं, वहीं इन जानवरों के हमले में खेत की रखवाली कर अब तक कई किसानों की जान भी चली गई है। फसलों को हो रहे नुकसान की वजह से किसानों में छुट्टा जानवरों के साथ सरकार के प्रति भी नाराजगी है। किसानों का कहना है कि जब छुट्टा जानवर सड़क पर घूम रहे हैं तो गौशाला के नाम पर नौटंकी क्यों हो रही है।

सरकार को उतना ही दिखता है जितना अधिकारी और उनके समर्थक उन्हें दिखाते हैं। शायद यही वजह है कि सड़कों पर घूम रहे छुट्टा जानवर न तो सरकार को नजर आ रहे हैं और न ही उनके नुमाइंदों को। हालांकि बीते दिनों आगरा में मुख्यमंत्री की फिलीट में भी सांड घुस गया था, जिसके चलते गाडियों को धीमी करनी पड़ गई थी। बावजूद इसके छुट्टा जानवरों की समस्या का अगर सरकार को एहसास नहीं हो रहा है, तो ऐसे में और उम्मीद करना बेकार ही है।

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बीते दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया था कि वह सुनिस्चित करें कि कोई छुट्टा जानवर सड़क पर न दिखे। बावजूद इसके सड़कों पर छ्ट्टा जानवरों का झंड देखा जा रहा है। वहीं किसान फसल की सुरक्षा को लेकर काफी परेशान हैं। किसानी के लिए समस्या बने छुट्टा जानवरों पर अंकुश लगाने के बजाय जिम्मेदार अधिकारी मौन बने हुए हैं। सड़क हादसे की वजह भी छुट्टा जानवर बन रहे हैं। गोंडा-बहराइच मार्ग पर अक्सर छुट्टा जानवरों का झुंड दिखाई देता है।

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