पहली बार सुप्रीम कोर्ट में एक साथ 9 जजों ने ली शपथ, 3 महिलाएं भी शामिल

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Supreme Court 9 judges oath

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में आज नया रिकॉर्ड स्थापित करते हुए एक साथ 9 जजों ने शपथ ली। सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब एकसाथ 9 जजों ने शपथ ली है। इन जजों में 3 महिला जज भी शामिल हैं। इन तीन महिला जजों में जस्टिस नागरत्ना भी शामिल हैं, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि वर्ष 2027 में वह सर्वोच्च न्यायालय की चीफ जस्टिस बन सकती हैं। इसके साथ जस्टिस पीएस नरसिम्हा भी हैं, ​जो सीधे सुप्रीम कोर्ट में अपाइंट हुए हैं। जस्टिस पीएस नरसिम्हा भी वर्ष 2028 में चीफ जस्टिस बन सकते हैं।

जस्टिस बीवी नागरत्ना

सुप्रीम कोर्ट में आज शपथ लेने वाली जस्टिस नागरत्ना 2008 में कर्नाटक हाईकोर्ट में एडिशनल जज नियुक्त की गई थीं और वर्ष 2010 में उन्हें स्थाई तौर जज नियुक्त कर दिया गया। वर्ष 2012 में फेक न्यूज के बढ़ते मामलों को देखते हुए जस्टिस नागरत्ना और अन्य जजों ने केंद्र सरकार को आदेशित किया था कि वे मीडिया ब्रॉडकास्टिंग को रेगुलेट करने की संभावनाओं की जांच करें। साथ ही उन्होंने मीडिया पर सरकारी नियंत्रण के खतरों से भी सतर्क किया था।

जस्टिस हिमा कोहली

जस्टिस हिमा कोहली तेलंगाना हाईकोर्ट की जज रही हैं। इसके साथ ही वह हाई कोर्ट में चीफ जस्टिस बनने वाली पहली महिला जज भी रहीं। वह दिल्ली हाई कोर्ट में भी जज रह चुकी हैं। जस्टिस कोहली की पहचान लीगल एजुकेशन और लीगल मदद से जुड़े अपने फैसलों के लिए है। दिल्ली हाई कोर्ट में जज रहते हुए उन्होंने दृष्टि बाधित लोगों को सरकारी शिक्षण संस्थानों में सुविधाएं दिए जाने का आदेश दिया था।

जस्टिस बेला त्रिवेदी

जस्टिस बेला त्रिवेदी गुजरात हाईकोर्ट में 9 फरवरी, 2016 को जज नियुक्त की गई थीं। वर्ष 2011 में वह इसी हाई कोर्ट में एडिशनल जज थीं। इससे पहले वह राजस्थान हाई कोर्ट में भी एडिशनल जज रह चुकी हैं। इनका पूरा नाम जस्टिस बेला मनधूरिया त्रिवेदी है।

जस्टिस अभय श्रीनिवास ओका

जस्टिस अभय श्रीनिवास ओका बॉम्बे हाई कोर्ट में एडिशनल और परमानेंट जज रह चुके हैं। वर्ष 2019 में कर्नाटक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त किए गए थे। जस्टिस ओका सिविल, कॉन्स्टिट्यूशनल और सर्विस मैटर्स के स्पेशलिस्ट रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने कर्नाटक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रहते हुए लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा और राज्यों की ज्यादतियों को लेकर फैसले दिए थे। इसके अलावा उन्होंने राज्यों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया है।

जस्टिस विक्रम नाथ

जस्टिस विक्रम नाथ गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं। इससे पहले वह इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज रहे हैं। सूत्रों की माने तो इससे पहले उनका नाम आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की तरह रिकमेंड किया गया था, लेकिन केंद्र ने इस सिफारिश को नामंजूर कर दिया था। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के समय वह देश के पहले चीफ जस्टिस थे, जिन्होंने हाई कोर्ट में वर्चुअल कार्यवाही की शुरुआत की थी।

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जस्टिस जितेंद्र कुमार माहेश्वरी

जस्टिस जितेंद्र कुमार माहेश्वरी सिक्किम हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं। इससे पहले वे आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के भी चीफ जस्टिस रहे। वह मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में भी जज रह चुके हैं। मध्य प्रदेश के जौरा में जन्में जस्टिस जितेंद्र कुमार माहेश्वरी हाई कोर्ट की बेंच के लिए प्रमोट होने से पहले वे ग्वालियर में वकील थे।

जस्टिस सीटी रवि

जस्टिस सीटी रवि केरल हाईकोर्ट में जज रह चुके हैं। जस्टिस सीटी रवि के पिता मजिस्ट्रियल कोर्ट में बेंच क्लर्क थे। उन्होंने केसों के स्पीड ट्रायल को लेकर बड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि कानून की उम्र लंबी होती है, पर इंसान की जिंदगी छोटी होती है। यह कमेंट उन्होंने वर्ष 2013 में भ्रष्टाचार के एक मामले में दिया था।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा

जस्टिस पीएस नरसिम्हा बार से सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने वाले पहले जज हैं। इसी के साथ बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने वाले वे देश के नौंवें जज हैं। बताया जा रहा है कि वर्ष 2028 में वह चीफ जस्टिस भी बन सकते हैं। आगे चलकर अगर ऐसा होता है तो बार से नियुक्त होने के बाद चीफ जस्टिस बनने वाले वे देश के तीसरे न्यायाधीश होंगे। वह वर्ष 2014 से 2018 तक एडिशनल सॉलिसिटर जनरल भी रह चुके हैं।

जस्टिस एमएम सुंदरेश

जस्टिस एमएम सुंदरेश केरल हाईकोर्ट के जज रहे हैं। उन्होंने वर्ष 1985 में वकालत शुरू की थी। उन्होंने चेन्नई से बीए करने के बाद मद्रास लॉ कॉलेज से लॉ की डिग्री हासिल की थी।

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