जानें लाल किला कैसे बना देश की आन, बान और शान, क्या है इसका इतिहास

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नई दिल्ली: 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली के लाल किले (Red Fort) की सुरक्षा अभेद कर दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले (Red Fort) पर तिरंगा झंडा फहराएंगे। 26 जनवरी और 15 अगस्त के मौके पर लाल किला और उसकी सुरक्षा चर्चा में आ जाती है। वैसे लाल किले (Red Fort) की सुरक्षा हमेशा चौकस रहती है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी हो जाता है कि लाल किला (Red Fort) इतना जरूरी क्यों, क्या है इसका इतिहास। लाल किले (Red Fort) के बारे में वैसे तो सभी ने कुछ न कुछ पढ़ा है और जाना भी है। लेकिन इतिहास के झरोखे से देखा जाए तो दिल्ली का लाल किला कई यादें अपने साथ सिमेटे हुए है।

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लाल किले (Red Fort) उस दौर का गवाह है, जिसे हम इतिहास के पन्ने में खोजते हैं। लाल किला मुगलों का स्वर्णिम युग को देखा तो उनके पतन का गवाह भी बना। लाल किले की बुलंद इमारत में कई राजनीतिक षडयंत्र भी रचे गए। इससे जुड़ी जानकारियों को इतिहासकारों ने विस्तार से वर्णित किया है। इतिहास के झरोखे से देखें तो वर्ष 1928 में शाहजहां को महसूस हुआ कि आगरा का किला छोटा है। इसके बाद उसने यमुना तट पर नया किला बनवाने का निर्णय किया। वहीं कुछ इतिहासकारों का मत है कि मुमताज की मौत के बाद शाहजहां का आगरा से मोह भंग हो गया था।

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15 जून, 1948 को शाहजहां लाल किले में प्रवेश किया था। माना जाता है कि लाल किले का निर्माण लाल पत्थरों से किया गया था। इन पत्थरों को नदी के रास्ते फतेहपुर सीकरी के पास से दिल्ली लाया गया था। लाल बलुआ पत्थर से निर्माण होने की वजह से इसे लाल किला कहा जाने लगा। लाल किले में इस्लामी, मुगल और फारसी शैली की झलक देखने को मिलती है। लाल किले की वह जगह जो बादशाह बैठकर फरियादियों के दुख दर्द को सुनते थे उसे दीवान ए आम कहा गया। इसी तरह जहां मंत्रियों और अधिकारियों से मुलाकात होती थी, उसे दीवान ए खास कहा गया।

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लाल किले ने मुगलों के पतन के बाद ब्रिटिश हुकूमत की क्रूरता का भी गवाह बना। उसने षडयंत्र रचने वालों को देखा तो वहीं कई को इसका शिकार बनता देखा। फिलहाल ब्रिटिश हुकूमत से आजादी मिलने के बाद देश पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने बर्व 1947 में लाल किले पर राष्ट्रीय झंडा फहराया था। वहीं इस बार लाल किले पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। क्योंकि 26 जनवरी को किसान आंदोलन के नाम पर कुछ लोगों ने लाल किले में घुस कर उग्र तांडव मचाया था, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।

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ऐसे में लाल किले पर आंतरिक घतरे को देखते हुए इस बार विशालकाय कंटेनरों का सहारा लिया जा रहा है। लाल किले के प्रवेश द्वार के पास कई लेयर में कंटेनर की दीवार तैयार की गई है।

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