कांग्रेस में बड़े बगावत की सुगबुगाहट, अब नटवर सिंह ने भी दिखाए तेवर

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Natwar Singh

नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी की दयनीय स्थिति को देखकर अब सीनियर नेताओं ने अपनी चुप्पी तोड़नी शुरू कर दी है। हालांकि अब काफी देर हो चुकी है, लेकिन वरिष्ठ ने नेताओं के पास अब इसके सिवाए कोई चारा भी नहीं बचा है। पंजाब कांग्रेस में आज जो कुछ हो रहा है, उसके लिए पार्टी आलाकमान भी कहीं न कहीं से जिम्मेदार है। पार्टी के सीनियर नेता कपिल सिब्बल के बाद पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने भी पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला है। हालांकि यह पहला मौका है जब कांग्रेस में किसी नेता ने राहुल गांधी पर बोलने की हिम्मत दिखाई है।

नटवर सिंह ने साफ कहा कि आज कांग्रेस में जो कुछ भी हो रहा है वह सही नहीं है। उन्होंने इसके लिए तीन लोगों जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इनमें से एक राहुल गांधी भी है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के पास आज भले ही कोई पद नहीं है, लेकिन पार्टी के सारे फैसले वही लेते हैं। उन्होंने कहा कि अब तो न कभी वर्किेंग कमेटी की बैठक होती है और न ही राष्ट्रीय कार्यकारिणी बुलाई जाती है। उन्होंने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाने का फैसला राहुल गांधी ने लिया, जिनका 52 वर्ष का राजनीतिक अनुभव रहा है, उन्हें बिना विचार विमर्श किए हटा दिया गया।

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नटवर लाल ने कांग्रेस पर ​लीडरशिप पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ने कैप्टन की जगह उस सिद्धू को जिम्मेदारी दे दी कभी भी कोई फैसला ले सकता है। उन्होंने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि सिद्धू ने एकबार राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वह अप राष्ट्रपति से मुलाकात कर कहा था कि क्या मैं अपना इस्तीफा वापस ले सकता हूं। इस पर हामिद अंसारी ने जवाब दिया था कि अब इस्तीफा वापस नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में आज जो हालत हैं, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि पार्टी में तीन लोग बैठे हैं जो सारे फैसले ले रही हैं।

नटवर सिंह ने कहा कि इनमें से राहुल गांधी एक हैं। जिनके पास कोई पद भी नहीं है, लेकिन पार्टी के सारे फैसले वही ले रहे हैं। उन्होंने राहुल और प्रियंका की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इन दोनों ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाने का फैसला लिया। बता दें कि इससे पहले कपिल सिब्बल ने भी चिंता जाहिर करते हुए पार्टी में नियमित अध्यक्ष चुने जाने की मांग की थी। ज्ञात हो कि कांग्रेस में उभरत नेताओं के पर कतरने की परिपाटी रही है। लेकिन अब वह दौर गुजर चुका है, आज वह कांग्रेस नहीं रह गई है जहां जगह पाने के लिए नेताओं की लाइन लगी रहती है। आज कांग्रेस के सामने अपने नेताओं को बचाए रखने की चुनौती है। ऐसे में मनमर्जी के लिए गए फैसले कांग्रेस को और गर्त में ले जा सकते हैं।

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