टूटी सड़कों के साथ टूट रहा क्षेत्रवासियों का जनप्रतिनिधियों से भरोसा

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Broken roads

प्रकाश सिंह

गोंडा: ‘तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये दावे झूठे हैं, ये बातें किताबी हैं।’ वर्षों पहले कवि अदम गोंडवी की लिखी पंक्ति आज भी सरकारी तंत्र पर एकदम सटीक बैठती हैं। विकास की अंधी दौड़ में गांवों का तेजी से शहरीकरण हुआ है, मगर कुछ गांव आज भी ऐसे हैं जहां का विकास केवल सपना नजर आता है। परसपुर विकासखंड के कई गांवों को जोड़ने वाली सड़क विशुनपुर कला मार्ग गड्ढे में तब्दील हो चुका है, लेकिन इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। जबकि यह मार्ग परसपुर विकास खंड के साथ अस्पताल और थाने को भी जोड़ती है। बावजूद इसके किसी जनप्रतिनिधि की नजर इस गड्ढा युक्त सड़क पर नहीं पड़ रही है।

वर्ष 2017 में यूपी की सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की सड़कों को गड्ढामुक्त करने का दावा किया था, लेकिन सरकार का कार्यकाल खत्म होने को है, मगर सड़कों के गड्ढे खत्म होने की जगह और बढ़ गए हैं। गांव की सड़कों की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है। हालांकि यूपी विधानसभा चुनाव करीब आ गया है। जन प्रतिनिधि एकबार फिर क्षेत्र में सक्रिय हो गए हैं। जो सत्ता में हैं वह विकास की गंगा बहाने की बात कर रहे हैं और जो सत्ता में आने का प्रयास कर रहे हैं वह सरकार बनने पर क्षेत्र के कायाकल्प करने का संकल्प ले रहे हैं।

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मजे की बात यह है कि ये सारी बातें पुरानी होने के बावजूद भी चुनाव के समय नई लगने लगती हैं। जनता के साथ जनप्रतिनिधि भी अपनी पसंद की सरकार बनाने की बात कर रहे हैं। लेकिन इस पर चर्चा करने को कोई तैयार नहीं है कि पांच साल बीते जाने के बावजूद भी सड़कों की मरम्मत क्यों नहीं हुई। फिलहाल टूटी सड़कों का गुस्सा विशुनपुर क्षेत्र के लोगों में देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि टूटी सड़कों के साथ उनका भरोसा भी जनप्रतिनिधियों से टूट चुका है।

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