आजम खां के रिहा होते ही बढ़ी सियासी तकरार, जानें किसने क्या कहा

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Azam Khan released from Sitapur Jail

प्रकाश सिंह

लखनऊ: करीब ढाई साल बाद सपा नेता आजम खान (Azam Khan) के सीतापुर जेल से रिहा होते सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। एम तरफ जहां पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के न पहुंचने के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं, वहीं शिवपाल सिंह यादव आजम खान के साथ (Shivpal Yadav with Azam, Azam Khan) नजर आ रहे हैं। इसको लेकर समाजवादी पार्टी के नेताओं के बीच भी मतभेद देखे जा रहे हैं। हालांकि आजम खान की रिहाई का समाजवादी पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने ट्वीट के जरिए स्‍वागत किया है। उन्‍होंने लिखा- ‘सपा के वरिष्ठ नेता व विधायक आज़म ख़ान के जमानत पर रिहा होने पर उनका हार्दिक स्वागत है। जमानत के इस फ़ैसले से सर्वोच्च न्यायालय ने न्याय को नये मानक दिये हैं। पूरा ऐतबार है कि वो अन्य सभी झूठे मामलों-मुक़दमों में बाइज़्ज़त बरी होंगे। झूठ के लम्हे होते हैं, सदियाँ नहीं!

उधर सीतापुर जेल के बाहर आजम खान का स्वागत करने के बाद शिवपाल यादव ने कहा कि हम लोग समाजवादी है। नेताजी से हमने सीखा है सुख दुख में साथ रहना। आजम भाई हमारे साथी रहे हैं और हैं। हमारी बातचीत आज भी हुई है और आगे भी होती रहेगी।

Azam Khan

वहीं ढाई साल से सीतापुर की जेल में बंद समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता मोहम्मद आजम खां को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद शुक्रवार को जेल से रिहा कर दिया गया। आजम खान को जेल से रिसीव करने के लिए उनके दोनों बेटों के अलावा शिवपाल सिंह यादव भी सीतापुर जेल पहुंचे। वहीं आजम खान की रिहाई के बाद ऑल इंडिया तंजीम उलेमा ए इस्लाम के राष्ट्रीय महासचिव और दरगाह आला हजरत के प्रचारक मौलाना शाहबुद्दीन ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा और अखिलेश यादव पर आजम खान की अनदेखी का आरोप लगाया।

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मौलाना ने बयान जारी करते हुए कहा कि अल्लाह का शुक्र है कि आजम खान ढाई साल बाद जेल से रिहा हो गए हैं लेकिन अखिलेश यादव ने आजम खान का साथ नहीं दिया और उन्हें अकेला ही छोड़ दिया। आजम खान ने खुद अपनी कानूनी लड़ाई लड़ी और अपनी कोशिशों से ही वो जेल से बाहर आए। हमे अफसोस हो रहा है मुसलमानों के सियासी रहनुमा ने उन्हें अकेला ही छोड़ दिया। आखिर क्या वजह है कि अखिलेश यादव ने आजम खान का साथ नहीं दिया। इसका हम जवाब चाहते हैं, मुस्लिम मसाइल की अनदेखी का भी हम अखिलेश यादव से जवाब चाहते हैं।

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